2007/06/03

डर

अनिर्णय सी स्थिति में

परेशानियों से

दूर भागते हुए

रात में उन

तारों के साथ

जलती हूँ,

सुबह से।

रात बिताती हूँ आँखें फाड़ कर

तकती हूँ शून्य को

और डरती हूँ

सुबह से।

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